साइटिका का इलाज (Sciatica Ka Ilaj)

साइटिका का इलाज (Sciatica Ka Ilaj)

कमर या कूल्हे से शुरू होकर जांघ के पीछे से होता हुआ पैर तक उतरने वाला बिजली जैसा दर्द बहुत परेशान करता है। लोग इसे साइटिका कहते हैं, और इंटरनेट पर sciatica in hindi और sciatica ka ilaj जैसे शब्दों से इसके बारे में खूब खोजते हैं। इस लेख में हम आसान हिंदी में बताएंगे कि साइटिका क्या है, इसके लक्षण और कारण क्या हैं, घर पर क्या किया जा सकता है और साइटिका का इलाज बिना सर्जरी कैसे होता है।

यह जानकारी वेदांत पेन मैनेजमेंट क्लिनिक, फरीदाबाद के अनुभव पर आधारित है। यह डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है।

साइटिका क्या है? (Sciatica in Hindi)

हमारे शरीर की सबसे लंबी नस साइटिक नस है, जो कमर के निचले हिस्से से निकलकर कूल्हे, जांघ और घुटने के पीछे से होते हुए पैर तक जाती है। जब इस नस की जड़ों पर दबाव पड़ता है या सूजन आ जाती है, तो दर्द उसी रास्ते पर महसूस होता है। इसी को साइटिका कहते हैं।

असल में साइटिका कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि एक लक्षण है। इसके पीछे कोई और समस्या होती है, जैसे डिस्क का खिसकना या रीढ़ की नलिका का सिकुड़ना। इसलिए इलाज भी कारण के हिसाब से तय होता है।

साइटिका के लक्षण

  • कमर या कूल्हे से शुरू होकर एक पैर में नीचे तक जाने वाला दर्द
  • जलन, बिजली के झटके जैसा या चुभने वाला दर्द
  • पैर या पंजे में झुनझुनी और सुन्नपन
  • बैठने, खांसने, छींकने या आगे झुकने पर दर्द बढ़ना
  • पैर में कमजोरी या पंजा उठाने में दिक्कत
  • रात में दर्द बढ़ना और नींद टूटना

साइटिका का दर्द ज्यादातर एक ही पैर में होता है। अगर दोनों पैरों में एक साथ कमजोरी या सुन्नपन हो, तो इसे हल्के में न लें।

साइटिका के कारण

  • कमर की डिस्क का उभरना या खिसकना। इसके बारे में स्लिप डिस्क का इलाज पेज पर पढ़ सकते हैं
  • डिस्क बल्ज, जिस पर हमारा पेज डिस्क बल्ज का इलाज विस्तार से बताता है
  • रीढ़ की नलिका या नस के निकलने के रास्ते का सिकुड़ना
  • उम्र के साथ कमर के जोड़ों और डिस्क में घिसाव
  • कूल्हे की गहराई में स्थित पिरिफॉर्मिस मांसपेशी का कस जाना, जिससे नस पर दबाव पड़ता है। इसे पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम कहते हैं
  • एक कशेरुका का दूसरी पर खिसक जाना
  • चोट, गिरना या लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना

कमर की समस्या से अलग, कुछ और स्थितियां भी पैर में दर्द देती हैं, जैसे कूल्हे के जोड़ की समस्या या नसों में रक्त प्रवाह की कमी। इसलिए सही जांच बहुत जरूरी है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

नीचे दिए लक्षणों में अपॉइंटमेंट का इंतजार करने के बजाय सीधे इमरजेंसी में जाएं:

  • पेशाब या शौच पर नियंत्रण कम होना
  • जांघों के भीतरी हिस्से या जननांग के आसपास सुन्नपन
  • पैर में तेजी से बढ़ती कमजोरी या पंजा लटक जाना
  • तेज बुखार के साथ कमर में दर्द
  • हादसे के बाद अचानक शुरू हुआ तेज दर्द

साइटिका की जांच कैसे होती है?

सिर्फ एमआरआई रिपोर्ट से साइटिका का कारण पूरी तरह नहीं पता चलता। कई लोगों की रिपोर्ट में डिस्क बल्ज दिखता है लेकिन दर्द नहीं होता, और कई लोगों को तेज दर्द होता है जबकि रिपोर्ट सामान्य लगती है। इसलिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी बात सुनते हैं और जांच करते हैं।

  • दर्द कब शुरू हुआ, कहां तक जाता है और किस हरकत से बढ़ता है
  • कमर की गति, पैर की ताकत, रिफ्लेक्स और संवेदना की जांच
  • नस को खींचने वाले आसान परीक्षण
  • जरूरत पड़ने पर एक्स-रे, एमआरआई या नस की जांच
  • चुनिंदा मामलों में एक छोटे इंजेक्शन से यह पक्का करना कि किस नस से दर्द आ रहा है

साइटिका का इलाज (sciatica ka ilaj)

अच्छी खबर यह है कि ज्यादातर लोगों में साइटिका का इलाज बिना सर्जरी के हो जाता है। इलाज कदम दर कदम चलता है।

दवाइयां और आराम

शुरुआती दिनों में दर्द और सूजन कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाइयां दी जाती हैं। नस के दर्द के लिए अलग तरह की दवा भी काम आती है। लंबे समय तक बिस्तर पर लेटे रहने की सलाह आजकल नहीं दी जाती, क्योंकि इससे ठीक होने में देर लगती है।

फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज

दर्द कम होने पर पेट और पीठ की मांसपेशियों की मजबूती, कूल्हे की लचक और नस की सही गति पर काम किया जाता है। यही हिस्सा दर्द को दोबारा लौटने से रोकता है।

इंजेक्शन से इलाज

जब दवा और कसरत से भी तेज दर्द बना रहता है, तब इमेज गाइडेंस में एपिड्यूरल इंजेक्शन से नस के आसपास की सूजन कम की जाती है। एक तरीका कॉडल एपिड्यूरल है। अगर एक ही नस जिम्मेदार हो, तो सेलेक्टिव नर्व रूट ब्लॉक से सीधे उसी नस पर इलाज किया जाता है। इंजेक्शन के खर्च और प्रकार के बारे में जानने के लिए एपिड्यूरल इंजेक्शन का खर्च वाला पेज पढ़ सकते हैं।

सर्जरी कब जरूरी होती है?

सर्जरी तब सोची जाती है जब स्कैन में नस पर गंभीर दबाव दिखे, पैर की कमजोरी बढ़ रही हो या सही इलाज के बाद भी दर्द कम न हो। ऐसी स्थिति में हम स्पाइन सर्जन से राय लेने की सलाह देते हैं।

साइटिका में घर पर क्या करें?

  • हर 30 से 40 मिनट में बैठने की स्थिति बदलें, लगातार घंटों न बैठें
  • कमर के पीछे सहारा लेकर बैठें और बहुत नरम सोफे या नीची सीट से बचें
  • हल्की सैर करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं
  • सोते समय करवट लेकर दोनों घुटनों के बीच तकिया रखें
  • दर्द वाली जगह पर गुनगुना या ठंडा सेंक करें, जो आराम दे
  • वजन संतुलित रखें, क्योंकि पेट का वजन कमर पर दबाव बढ़ाता है

साइटिका में आसान एक्सरसाइज

नीचे दी गई कसरत हल्के दर्द में आम तौर पर की जाती हैं। इन्हें धीरे-धीरे करें। अगर पैर का दर्द या सुन्नपन बढ़े तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से पूछें।

  • घुटना छाती की ओर: पीठ के बल लेटकर एक घुटना धीरे से छाती की ओर लाएं, 15 से 20 सेकंड रोकें।
  • पिरिफॉर्मिस स्ट्रेच: लेटे हुए एक टखना दूसरे घुटने पर रखें और जांघ को हल्के से अपनी ओर खींचें।
  • पेल्विक टिल्ट: घुटने मोड़कर लेटें, पेट अंदर खींचकर कमर जमीन की ओर दबाएं और पांच सेकंड रोकें।
  • सैर: रोज थोड़ी दूरी से शुरू करें और दर्द के हिसाब से धीरे-धीरे बढ़ाएं।

कसरत का सही सेट आपकी जांच पर निर्भर करता है। ज्यादा जानकारी के लिए एक्सरसाइज पेज देख सकते हैं।

साइटिका में क्या न करें?

  • झटके से झुकना या भारी वजन उठाना
  • हफ्तों तक सिर्फ बिस्तर पर लेटे रहना
  • बिना सलाह के लंबे समय तक दर्द की गोलियां या स्टेरॉयड लेना
  • हड्डी बिठाने वाले से कमर की झटकेदार मालिश या मोड़-तोड़ करवाना
  • पैर में कमजोरी या पेशाब की दिक्कत को नजरअंदाज करना

साइटिका से बचाव

  • नियमित रूप से पेट और पीठ की कसरत करें
  • ऑफिस में बैठने की सही मुद्रा रखें और बीच-बीच में उठकर चलें
  • भारी सामान घुटने मोड़कर उठाएं
  • वजन संतुलित रखें और धूम्रपान से बचें
  • कमर दर्द को शुरू में ही गंभीरता से लें। इसके लिए बैक पेन ट्रीटमेंट पेज देखें

डॉक्टर से मिलने से पहले क्या तैयार रखें?

पहली मुलाकात में सही जानकारी देने से जांच आसान हो जाती है। अपने साथ पुरानी एक्स-रे या एमआरआई रिपोर्ट, चल रही दवाइयों की सूची और अगर कोई पुराना इलाज हुआ है तो उसकी पर्ची रखें। यह भी नोट कर लें कि दर्द कब शुरू हुआ, किस स्थिति में बढ़ता है और किससे आराम मिलता है। अगर आपको डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या खून पतला करने की दवा चल रही है, तो डॉक्टर को जरूर बताएं।

फरीदाबाद में साइटिका का इलाज

अगर पैर तक जाने वाला दर्द कई हफ्तों से परेशान कर रहा है, तो वेदांत पेन मैनेजमेंट क्लिनिक में जांच करवा सकते हैं। यहां पहले सही कारण पहचाना जाता है और फिर बिना सर्जरी इलाज की योजना बनाई जाती है। विस्तार से जानने के लिए फरीदाबाद में साइटिका का इलाज पेज देखें। दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम से भी मरीज यहां आते हैं। पुरानी रिपोर्ट और चल रही दवाइयों की सूची साथ लाएं।

पता: मकान नंबर 21, सेक्टर 9, सेक्टर 9 हुडा मार्केट के सामने, फरीदाबाद, हरियाणा 121006
फोन: +91 8171244512
समय: सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक

निष्कर्ष

साइटिका का दर्द तकलीफदेह होता है, लेकिन सही कारण पहचानकर इलाज करने से ज्यादातर लोग राहत पा लेते हैं। कसरत, सही बैठने की आदतें और समय पर जांच इसमें सबसे अहम हैं। अगर दर्द लंबे समय से है, बार-बार लौट रहा है या पैर में कमजोरी महसूस हो रही है, तो देर न करें और विशेषज्ञ से मिलें।

लेखक: डॉ. मोहित गुप्ता, इंटरवेंशनल पेन फिजिशियन, वेदांत पेन मैनेजमेंट क्लिनिक, फरीदाबाद। यह जानकारी सामान्य शिक्षा के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है।

Frequently Asked Questions

कई लोगों में साइटिका का दर्द कुछ हफ्तों से कुछ महीनों में कम होने लगता है, लेकिन यह कारण पर निर्भर करता है। डिस्क का ज्यादा दबाव या नलिका का सिकुड़ना हो तो समय ज्यादा लग सकता है। अगर छह हफ्ते से ज्यादा दर्द रहे या कमजोरी आए, तो विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।
सामान्य कमर दर्द कमर तक सीमित रहता है, जबकि साइटिका में दर्द कमर या कूल्हे से शुरू होकर आमतौर पर एक पैर के पिछले हिस्से में नीचे तक जाता है। साइटिका में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन भी हो सकता है, क्योंकि इसमें नस पर असर पड़ता है।
ज्यादातर लोगों के लिए हल्की और छोटी सैर फायदेमंद रहती है, क्योंकि लेटे रहने से अकड़न बढ़ती है। अगर चलने से पैर में दर्द या सुन्नपन तेजी से बढ़े, तो रुककर आराम करें और डॉक्टर से दूरी और गति के बारे में सलाह लें।
लेटने की स्थिति में कई बार नस पर दबाव बढ़ जाता है और दिन भर की हलचल कम हो जाती है, इसलिए रात में दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। करवट लेकर घुटनों के बीच तकिया रखने से कुछ लोगों को आराम मिलता है।
ज्यादातर मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। जब पैर में कमजोरी तेजी से बढ़े, पेशाब या शौच पर नियंत्रण कम हो या सही इलाज के बाद भी तेज दर्द बना रहे, तब सर्जन से राय लेना जरूरी हो जाता है।
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