सुबह उठते ही गर्दन अकड़ी हुई लगे, कंधे से हाथ तक दर्द उतरे या उंगलियों में झुनझुनी रहे, तो लोग अक्सर कहते हैं कि सर्वाइकल हो गया है। इंटरनेट पर भी बहुत से लोग cervical ke lakshan और cervical ka ilaj सर्च करते हैं। इस लेख में हम आसान हिंदी में बताएंगे कि सर्वाइकल के लक्षण क्या होते हैं, इसके कारण क्या हैं, कौन से संकेत खतरे की घंटी हैं और बिना सर्जरी इलाज कब और कैसे संभव है।
यह जानकारी फरीदाबाद के वेदांत पेन मैनेजमेंट क्लिनिक के अनुभव पर आधारित है। यह डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है, क्योंकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है।
हमारी गर्दन में सात छोटी हड्डियां होती हैं, जिन्हें सर्वाइकल कशेरुकाएं कहते हैं। इनके बीच नरम गद्दी यानी डिस्क होती है, जो झटके सोखती है और गर्दन को घूमने में मदद करती है। इन हड्डियों के पीछे से रीढ़ की हड्डी की नलिका और नसें गुजरती हैं, जो सिर, कंधे और हाथों तक संदेश पहुंचाती हैं।
जब उम्र, गलत आदतों या चोट की वजह से ये डिस्क और जोड़ घिसने लगते हैं, तो गर्दन में दर्द और अकड़न शुरू हो जाती है। आम बोलचाल में इसी स्थिति को सर्वाइकल या सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस कहा जाता है। कई बार घिसे हुए हिस्से नसों पर दबाव डालते हैं, तब दर्द गर्दन से आगे हाथों तक पहुंच जाता है।
आजकल कम उम्र के लोगों में भी गर्दन की परेशानी बढ़ रही है, क्योंकि घंटों स्क्रीन देखने की आदत बन गई है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि यह सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं है।
सर्वाइकल के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को सिर्फ हल्की अकड़न होती है, जबकि कुछ को रोजमर्रा के काम में भी दिक्कत आती है। लक्षणों को तीन हिस्सों में समझना आसान रहता है।
इस तरह की स्थिति को मेडिकल भाषा में सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी कहते हैं। इसके बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए हमारा पेज सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी का इलाज देखें।
गर्दन से शुरू होने वाले सिरदर्द के बारे में हमारा लेख गर्दन से जुड़ा सिरदर्द पढ़ सकते हैं।
ज्यादातर गर्दन दर्द धीरे-धीरे ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ संकेत गंभीर हो सकते हैं। इनमें इंतजार न करें:
नहीं। गलत तरीके से सोने, भारी सामान उठाने या झटका लगने से गर्दन की मांसपेशी में खिंचाव आ सकता है, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। इसके बारे में गर्दन की मोच का इलाज पेज पर जानकारी है। कंधे की बीमारियां, जैसे फ्रोज़न शोल्डर, भी गर्दन जैसा दर्द दे सकती हैं। इसीलिए सिर्फ लक्षण देखकर खुद इलाज शुरू करने के बजाय सही जांच करवाना बेहतर है।
डॉक्टर सबसे पहले आपकी पूरी बात सुनते हैं: दर्द कब शुरू हुआ, कहां तक जाता है और किस हरकत से बढ़ता है। इसके बाद गर्दन की गति, मांसपेशियों की ताकत, हाथों की संवेदना और रिफ्लेक्स की जांच होती है। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या एमआरआई कराया जाता है। हर मरीज को एमआरआई की जरूरत नहीं होती। इसे तभी कराया जाता है जब लक्षण नस पर दबाव की तरफ इशारा करें या इलाज से आराम न मिले।
एक जरूरी बात यह है कि स्कैन की रिपोर्ट और मरीज की तकलीफ हमेशा मेल नहीं खाती। कई लोगों की रिपोर्ट में घिसाव दिखता है लेकिन उन्हें कोई दर्द नहीं होता। इसलिए इलाज रिपोर्ट के बजाय आपके लक्षणों और जांच के आधार पर तय होता है।
अच्छी खबर यह है कि ज्यादातर मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। सर्वाइकल का इलाज कदम दर कदम किया जाता है, जिसमें सबसे सरल उपाय पहले आजमाए जाते हैं।
दर्द और सूजन कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से कुछ समय तक दवाइयां दी जाती हैं। नस के दर्द में अलग तरह की दवाएं काम आती हैं। बिना पूछे लंबे समय तक दर्द की गोलियां न लें। शुरुआती दिनों में भारी काम से बचें, लेकिन गर्दन को बिलकुल स्थिर रखने की जरूरत नहीं होती। हल्की चाल-ढाल बनाए रखना ठीक रहता है।
गर्दन और कंधे की मांसपेशियों को मजबूत करना लंबे समय की राहत का सबसे अहम हिस्सा है। फिजियोथेरेपिस्ट आपकी स्थिति के हिसाब से स्ट्रेचिंग, मजबूती की कसरत और सही मुद्रा सिखाते हैं।
जब दर्द तेज हो और दवा-कसरत से आराम न मिले, तब चुनिंदा मरीजों में इमेज गाइडेंस में इंजेक्शन दिए जाते हैं। नस की सूजन के लिए सर्वाइकल एपिड्यूरल इंजेक्शन और जोड़ों के दर्द के लिए सर्वाइकल फेसेट ब्लॉक जैसे विकल्प हैं। ये इंजेक्शन दर्द कम करते हैं ताकि आप कसरत कर सकें। ये हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होते।
सर्जरी तब विचार में आती है जब हाथ-पैर में कमजोरी बढ़ रही हो, रीढ़ की नलिका पर गंभीर दबाव हो या लंबे समय के सही इलाज के बाद भी आराम न मिले। ऐसी स्थिति में हम साफ बताते हैं और जरूरत हो तो स्पाइन सर्जन के पास रेफर करते हैं।
हल्के दर्द में कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टरी इलाज की जगह न समझें।
गर्दन और कंधे की राहत के और उपाय आप गर्दन दर्द से राहत कैसे पाएं में पढ़ सकते हैं।
नीचे दी गई कसरत हल्के दर्द में आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं। इन्हें धीरे-धीरे और बिना झटके के करें। अगर दर्द बढ़े, हाथ में झुनझुनी हो या चक्कर आए, तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर से पूछें।
कसरत का सही सेट आपकी स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ और कसरत हमारे एक्सरसाइज पेज पर देख सकते हैं।
अगर आपको गर्दन दर्द, हाथों में झुनझुनी या चक्कर जैसी परेशानी लंबे समय से है, तो वेदांत पेन मैनेजमेंट क्लिनिक में जांच करवा सकते हैं। हमारे यहां दवाइयों, फिजियोथेरेपी और जरूरत होने पर इमेज गाइडेड इंजेक्शन के जरिए बिना सर्जरी इलाज पर जोर दिया जाता है। विस्तार से जानने के लिए फरीदाबाद में सर्वाइकल का इलाज पेज देखें। गर्दन दर्द की सभी जानकारी नेक पेन ट्रीटमेंट पेज पर भी है।
दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम से भी मरीज यहां आते हैं। आने से पहले अपनी पुरानी एक्स-रे या एमआरआई रिपोर्ट और चल रही दवाइयों की सूची साथ रखें।
पता: मकान नंबर 21, सेक्टर 9, सेक्टर 9 हुडा मार्केट के सामने, फरीदाबाद, हरियाणा 121006
फोन: +91 8171244512
समय: सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक
सर्वाइकल के लक्षण शुरुआत में हल्के लग सकते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर नसों पर दबाव और लंबे समय का दर्द बन सकता है। अच्छी बात यह है कि सही जांच, नियमित कसरत और आदतों में छोटे बदलावों से ज्यादातर लोग काफी आराम पा लेते हैं। अगर दर्द हफ्तों से चल रहा है या हाथ में झुनझुनी और कमजोरी है, तो देर न करें और डॉक्टर से मिलें।
लेखक: डॉ. मोहित गुप्ता, इंटरवेंशनल पेन फिजिशियन, वेदांत पेन मैनेजमेंट क्लिनिक, फरीदाबाद। यह जानकारी सामान्य शिक्षा के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है।